सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के चलते इसे भी माना जाएगा हिरासत में मौत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर कोई पुलिसकर्मी दमा से पीड़ित किसी व्यक्ति को मकड़ी के जालों से अटे धूलभरे कमरे में रखता है और इसके चलते रोगी की मौत हो जाती है तो इसे हिरासत में हुई मौत करार दिया जाएगा। यही नहीं, उस पुलिसकर्मी को गैर इरादतन हत्या का आरोपी माना जाएगा। न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर और मार्कडेय काटजू की पीठ ने 9 दिसम्बर को मध्य प्रदेश लोक आयुक्त के तहत कार्यरत पांच पुलिसकर्मियों की याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी।

पीठ ने कहा कि इस अपराध के लिए उन पर धारा 323 के तहत मुकद्दमा चलाया जा सकता है और इसके तहत एक साल की अधिकतम सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना किया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जिस कमरे में पीड़ित को रखा गया था वह दमे के रोगी के सर्वथा प्रतिकूल था, क्योंकि कमरा धूल और मकड़ी के जालों से पटा हुआ था। इसके चलते रोगी पर आसानी से दमे का दौरा पड़ सकता था जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत हुई और आखिरकार आर के जैन की मौत हो गई।

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