सिविल कोर्ट को आदेश देने का अधिकार नहीं!?: कोर्ट ने असिस्टेंट कलेक्टर को अवमानना के लिए सजा सुनाई

दिल्ली विकास प्राधिकरण के एक असिस्टेंट कलेक्टर द्वारा आदेश का पालन न करने के मामले में अवमानना के लिए दोषी ठहराते हुए, जस्टिस एसएन ढींगरा की पीठ ने, असिस्टेंट कलेक्टर दिनेश कुमार को छह माह कैद दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। पीठ ने दिनेश कुमार को तीन हफ्ते के अंदर तिहाड़ जेल नंबर एक में आत्मसमर्पण करने को कहा है। निर्धारित समय तक आत्मसमर्पण न करने पर पीठ ने तिलकमार्ग थाने के थानाध्यक्ष को निर्देश दिया कि वह उन्हें गिरफ्तार कर जेल का रास्ता दिखा दें। पीठ ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी है तो इसका मतलब साफ है कि हाईकोर्ट का फैसला सही है। लेकिन मामले में जानबूझ कर अनदेखी की जा रही है। जिससे DDA के अधिकारी का अखड़पन रवैया साबित होता है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश न मानना अदालत की तौहीन है। इसलिए ऐसे अधिकारियों को जेल का रास्ता दिखाया जाना ही उचित है।
इस मामले में सन् 1961 में सुरेंद्र पाल सिंह के पिता ने DDA में एक संपत्ति को नामांतरण करने के लिए आवेदन किया था। जागरण के विधि संवाददाता की रिपोर्ट है कि DDA द्वारा इससे इंकार करने पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर DDA को आदेश दिए जाने की मांग की थी। कोर्ट ने सन् 1961 में सुरेंद्र पाल सिंह के पक्ष में आदेश दिया था। इसके खिलाफ DDA ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने DDA की अपील खारिज कर दी थी। इसके बावजूद नामांतरण न करने पर सुरेंद्र पाल सिंह ने फिर हाईकोर्ट में डीडीए के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने जनवरी सन् 2003 में पहले तो DDA को सुरेंद्र को नामांतरण कर देने का आदेश दिया। जिस पर डीडीए ने फिर भी यह कहते हुए उन्हें नामांतरण देने से मना कर दिया कि इस संबंध में उसके पास पुराना रिकार्ड नहीं है। सिविल कोर्ट को कोई अधिकार नहीं है कि वह DDA को कोई आदेश दें। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए दिनेश कुमार को अवमानना के तहत छह माह कैद की सजा सुना दी।
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One thought on “सिविल कोर्ट को आदेश देने का अधिकार नहीं!?: कोर्ट ने असिस्टेंट कलेक्टर को अवमानना के लिए सजा सुनाई”

  1. हरीश ‘भादानी’जी की कविता याद आ गई उस का एक अंश …..

    हद कोई जब
    माने नहीं अहम,
    आँख तरेरे,
    बरसे बिना फहम,
    तब बाँसुरी बजे
    बंध जाए हथेली
    ले पहाड़ का छाता
    जय जय गोरधन
    काल का हुआ इशारा!

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