वजह बताए बिना आदेश जारी करने पर नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने वजह बताए बिना आदेश जारी करने के अदालतों के रिवाज पर गहरी नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति मुकंदकम शर्मा की खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले से अलग राय रखता है तो उसे इसके कारण देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उड़ीसा के पारादीप बंदरगाह पर पुलिस अधिकारियों समेत पांच लोगों की हत्या के एक मामले में 13 दिसम्बर को यह टिप्पणी की। उल्लेखनीय है कि 14 मार्च 1984 को पारादीप बंदरगाह पर श्रमिकों के दो गुटों के बीच संघर्ष में चार पुलिसकर्मी समेत पांच लोग मारे गए थे।

निचली अदालत ने इस मामले में हत्या के आरोप में पांच लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन, बाद में उड़ीसा हाईकोर्ट ने सभी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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One thought on “वजह बताए बिना आदेश जारी करने पर नाराजगी”

  1. सही है जो निर्णय/आदेश की वजह न बताए वह विश्वसनीय नहीं हो सकता और न्याय की साख को बट्टा लगाता है।

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