भविष्य निधि घोटाले में शामिल जजों ने, घोटाले के सूत्रधार को छिपने में मदद की

इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने गाजियाबाद के भविष्य निधि घोटाले के सूत्रधार आशुतोष अस्थाना की छिपने में मदद की थी। इसका खुलासा अस्थाना ने न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार को दिए बयान में किया है। मजिस्ट्रेट ने यह बयान अनुच्छेद 164 के तहत दर्ज किया है। मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक देश के चर्चित व अपने तरह के अनोखे मामले में गाजियाबाद जिला न्यायालय के करोड़ों रुपए के भविष्य निधि घोटाले के मुख्य सूत्रधार आशुतोष अस्थाना को हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों ने भरोसा दिया था कि ‘जांच पूरी होने के बाद वे मामले को देख लेगें।’

इतना ही नहीं जब गाजियाबाद पुलिस अस्थाना को गिरफ्तार करने के लिए ढूंढ़ रही थी, इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन तीन न्यायाधीशों ने अस्थाना को छिपने में मदद की थी। जिनके सहारे आशुतोष एक महीने से अधिक समय तक छिपा रहा। तीनों न्यायाधीशों का नाम घोटाले से लाभ कमाने वालों की सूची में है। घोटाले की जांच सीबीआई कर रही है।

अस्थाना के बयान के अनुसार 15 फरवरी को पूछताछ के बाद वह उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ए के सिंह, आर एन मिश्र और अंजनी कुमार से मिला। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद वे पूरे मामले को देख लेंगे। सेवा निवृत्त हो चुके न्यायमूर्ति अंजनी कुमार के बेटे चंदन ने उसके रहने की व्यवस्था इलाहाबाद में राजापुर के पास प्राइवेट मकान में की। जहां वह लगभग 15 दिन रहा। इसके बाद न्यायमूर्ति एके सिंह ने मिर्जापुर में किसी न्यायिक अधिकारी से बात कर उसके रहने की व्यवस्था विंध्याचल, मिर्जापुर के पंडित जी के यहां करवाई। वह वहां बीस दिन रहा। सेवा निवृत्त हो चुके न्यायमूर्ति आर एन मिश्र के पुत्र सुनील कुमार मिश्र ने उसके इलाहाबाद लौटने पर निरंजन टाकीज के पीछे उसके रुकने का इंतजाम कराया। फिर गाजियाबाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

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