पुलिस हिरासत में मौत: सरकार पर पांच लाख रु. हर्जाना

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नौ साल पहले अमृतसर पुलिस की हिरासत में हुई मौत की जांच 16 दिसम्बर को आईजी को सौंप दी। साथ ही जस्टिस एसडी आनंद ने सरकार को निर्देश दिया कि वह मृतक गुरतेज सिंह के परिवार को पांच लाख रुपए बतौर हर्जाना अदा करे। इस मामले में अमृतसर पुलिस आईपीसी की धारा 382 व 511 के तहत केस दर्ज कर गुरतेज को थाने ले गई थी। 11 दिसंबर 1999 को गुरतेज की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। इस मामले में कुछ पुलिसवालों पर FIR भी दर्ज की गई थी।

जांच के बाद पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताते हुए 12 जून 2000 को ट्रायल कोर्ट में केस खारिज करने की रिपोर्ट दे दी। तीन मार्च 2001 को अदालत ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। ललित कुमार, चंडीगढ़ से भास्कर में लिखते हैं कि मृतक के पिता कृष्ण सिंह ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की और अपने बेटे की मौत की जांच CBI से करवाने की मांग की।

याची की तरफ से कहा गया कि पुलिस ने मामले की जांच के सिलसिले में उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया। इस याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ा रिकॉर्ड तलब किया था। 16 दिसम्बर को अमृतसर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया कि केस रिकॉर्ड गुम है। इस पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच आईजी को सौंप दी।

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