दुर्घटना के बाद हृदय की बीमारी के चलते मौत को दुर्घटना में हुई मौत माना जाएगा

दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमे के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हार्ट अटैक से मौत तब मानी जाती है, जब सामान्य तौर पर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है और उसकी मौत हो जाती है। अगर व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो और उसके बाद उसकी मौत हृदय की बीमारी के चलते होती है तो ऐसी मौत को दुर्घटना में हुई मौत ही माना जाएगा। इस मामले में मृतक के परिजन दुर्घटना में हुई मौत का दावा पाने के हकदार होंगे।

राज्य उपभोक्ता आयोग ने जीवन बीमा निगम को निर्देश दिया कि वह मृतक जगदीश लाल की पत्नी को पचास हजार रुपये दावा और दस हजार रुपये मुआवजे के तौर पर प्रदान करे। आयोग के अध्यक्ष जेडी कपूर ने बीमा कंपनी की यह दलील भी ठुकरा दी कि मरने वाले की गलती के कारण दुर्घटना हुई थी। इसलिए उसे क्लेम नहीं मिलना चाहिए।

जगदीश लाल ने LIC से पचास हजार रुपये की पॉलिसी ले रखी थी। इसके अनुसार दुर्घटना में उसकी मौत होने पर उसके परिजनों को पॉलिसी की दोगुनी राशि मिलनी थी। 10 जनवरी 2004 को जगदीश की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उसे हृदय की बीमारी भी थी, जिस कारण उसकी दुर्घटना में मौत हो गई। कंपनी ने दुर्घटना के कारण मौत नहीं होने के बाद कहते हुए दावा देने से मना कर दिया था।

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One thought on “दुर्घटना के बाद हृदय की बीमारी के चलते मौत को दुर्घटना में हुई मौत माना जाएगा”

  1. सही निर्णय है,मृत्यु में दुर्घटना का योगदान तो है ही और तुरंत कारण भी वही बना है।

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