चोटों के निशान, दुष्कर्म साबित करने को काफी नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 1 दिसम्बर को एक अहम फैसले में कहा है कि किसी आरोपी की जांघों ओर कूल्हों के जोड़ पर चोट के निशानों का मतलब यह नहीं है कि अभियुक्त ने किसी महिला से दुष्कर्म किया हो। इसके साथ ही, शीर्ष कोर्ट ने एक महिला की अस्मत से खिलवाड़ करने व उसकी हत्या करने के मामले में उम्रकैद की सजा प्राप्त आरोपी को बरी कर दिया।

मामले में बलदेव सिंह को हरियाणा के जगाधरी जिले की सेशन कोर्ट ने बलविंदर कौर की अस्मत से खिलवाड़ करने और फिर हत्या करने के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

सन्दर्भ: CRIMINAL APPEAL NO. 320 OF 2007, सुप्रीम कोर्ट

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One thought on “चोटों के निशान, दुष्कर्म साबित करने को काफी नहीं”

  1. सही निर्णय है, केवल इस आधार पर सजा नहीं दी जा सकती है।

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