100 रूपये रिश्वत: 19 साल बाद 1 साल की कैद,10 गुना जुर्माना, सुप्रीम कोर्ट तक मुकद्दमें का खर्च अलग

सुप्रीमकोर्ट ने 19 साल पहले एक किसान से सौ रुपये रिश्वत ऐंठने वाले न्यूनतम वेतन निरीक्षक (कृषि) बलीराम को अब रिश्वत की रकम से 10 गुना जुर्माने के साथ, 1 साल की कठोर कैद की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत व न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने सजा के खिलाफ दाखिल बलीराम की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि सबूतों को देखने से स्पष्ट हो जाता है कि न सिर्फ रिश्वत की मांग की गई बल्कि रिश्वत स्वीकार भी की गई। पीठ ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

वर्ष 1989 में जब बलीराम न्यूनतम वेतन निरीक्षक (कृषि) के पद पर तैनात था तो एक दिन उस्मानाबाद के उपाला गांव में शिवाजी भांडू पडवाल के खेत पर निरीक्षण करने पहुंचा। वहां उसे शिवाजी का कर्मचारी लक्ष्मणन कदम काम करता मिला। उसने कदम से जब पूछा कि वह कौन है तो कदम ने कहा कि वह यहां कर्मचारी है और उसे तीन हजार रुपये सालाना वेतन मिलता है। बलीराम ने जब उससे काम के घंटे और छुट्टियों के बारे में पूछा तो वह ठीक-ठीक नहीं बता पाया। लक्ष्मणन को यह भी नहीं मालूम था कि उसके मालिक शिवाजी हिसाब-किताब का रजिस्टर रखते हैं या नहीं।

उस दिन बलीराम वहां से चला गया। बाद में उसने शिवाजी को दफ्तर में पेश होने का नोटिस भेजा और साथ में लक्ष्मणन के काम का हिसाब-किताब वाला रजिस्टर भी लाने का आदेश दिया। दो-तीन नोटिसों के बाद शिवाजी बलीराम के दफ्तर में पेश हुआ। उसने स्वीकार किया कि वह लक्ष्मणन के कामकाज का रजिस्टर में हिसाब नहीं रखता है लेकिन आगे से रखेगा। बलीराम ने उसे रजिस्टर रखे जाने का आदेश देते हुए कार्रवाई न करने के एवज में सौ रुपये रिश्वत मांगी। शिवाजी ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में की, जिसने छापामार दस्ता बना कर बलीराम को शिवाजी से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

निचली अदालत ने बलीराम को रिश्वत लेने का दोषी ठहराया और एक साल के कठोर कारावास तथा एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हाईकोर्ट और अब सुप्रीमकोर्ट से सजा पर मुहर लगने के बाद बलीराम के पास जेल भुगतने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।

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One thought on “100 रूपये रिश्वत: 19 साल बाद 1 साल की कैद,10 गुना जुर्माना, सुप्रीम कोर्ट तक मुकद्दमें का खर्च अलग”

  1. शिवाजी का कर्मचारी लक्ष्मणन जैसे सब लोग हो जाएँ तो दुनिया सुधर जाए।

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