सैनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से नाकाबिल, तो उसे नौकरी से निकाला नहीं जा सकता

उच्चतम न्यायालय ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर सेना द्वारा निकाले गए हजारों सैनिकों में पुन:बहाली की उम्मीद जगा दी है। अदालत ने इस संबंध में जारी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति सी के ठक्कर और न्यायमूर्ति डी के जैन की पीठ ने हाल ही में यह फैसला सुनाते हुए कहा कि जब तक निम्न स्वास्थ्य अवस्था वाले सैनिकों का मामला सेना के मेडिकल बोर्ड को नहीं भेजा जाता तब तक इन सैनिकों को इस आधार पर नौकरी से निकाला नहीं जा सकता कि ये जवान स्वास्थ्य की दृष्टि से नाकाबिल हैं।

केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिसमें निर्धारित मानदंडों का प्रयोग किए बिना निम्न स्वास्थ्य अवस्था के आधार पर सैनिकों को पद से मुक्त किए जाने के सेना के आदेश को निरस्त किया था और बहाली के लिए सैनिकों को याचिका दायर करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि सेना के इस फैसले से बड़ी संख्या में जवानों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर होना पड़ा जबकि सेना का एक भी अधिकारी चिकित्सकीय रूप से अयोग्य नहीं पाया गया था। सेना के इस आदेश से प्रभावित जवानों की अभी 15 से 20 वर्ष तक की सेवा अवधि बची थी।

उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से उन हजारों सैनिकों को लाभ होगा जो निम्न स्वास्थ्य अवस्था का घोषित किए जाने पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले थे। याचिकाकर्ताओं ने रक्षा मंत्रालय के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि उन्हें अयोग्य घोषित करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और उनके मामले सेना के मेडिकल बोर्ड को नहीं भेजे गए।

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

One thought on “सैनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से नाकाबिल, तो उसे नौकरी से निकाला नहीं जा सकता”

  1. लोकेश भाई बडी अच्छी जानकारी दी आपने। आपके ही शहर के जवान को सेना ने स्वास्थ्य कारणो से अनुपस्थित रहने पर भगोडा करार देकर बर्खास्त कर दिया था। मैने उसे रायपुर मे प्रेस कान्फ़ेंस करने की अनुमती दी थी,इस्लिये वो मुझे याद है।कोशिश करुंगा उस्का पता मिल जाये,अगर आप को भी खबर मिले तो उसकी जो मदद हो सके करियेगा वो बहुत ही लाचार हो चुका है और उसे मदद की ज़रुरत भी है।

    VA:F [1.9.22_1171]
    Rating: 0 (from 0 votes)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)