यौन शोषण मामले में फंसे डेरामुखी की अनुपस्थिति पर कोर्ट ने लगाई फटकार

हत्या सहित साध्वियों के यौन शोषण मामले में फंसे डेरामुखी संत गुरमीत सिंह राम रहीम के पेशी से गैर हाजिर रहने पर 8 नवम्बर को सीबीआई कोर्ट ने उनके वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए अगली पेशी पर हाजिर होने के सख्त निर्देश दिए। वहीं साध्वियों के यौन शोषण मामले में दो गवाह हाईकोर्ट के क्लर्क व पोस्टमास्टर के बयान दर्ज किए गए। साथ ही कोर्ट ने रंजीत और छत्रपति हत्याकांड में आरोपों पर बहस की कार्रवाई पूरी करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर निर्धारित की गई है।

वर्ष 2002 में गुमनाम पत्र के जरिए ही डेरा में साध्वियों के साथ यौन शोषण मामले का खुलासा हुआ था, जिसमें गुमनाम पत्र बांटने व छापने के आरोपों में ही कुरुक्षेत्र के रंजीत व सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या कर दी गई थी। इन दोनों हत्याओं में डेरामुखी को भी 120 बी का आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने तीनों मामलों में 31 जुलाई 2007 को सीबीआई के तत्कालीन स्पेशल मजिस्ट्रेट आरएन भारती के निवास पर चार्जशीट पेश की थी। पिछले छह सितंबर को यौन शोषण मामले में कोर्ट ने डेरामुखी पर आरोप तय कर दिया था।

इसी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के क्लर्क महेद्र सिंह व सचिवालय डाकघर के पोस्टमास्टर सीएल मीना की गवाही हुई। जिसमें क्लर्क ने कहा कि उन्होंने गुमनाम पत्र को संबंधित अधिकारी के पास भेज दिया था। अपनी गवाही में चंडीगढ़ सचिवालय डाकघर के पोस्टमास्टर ने भी कहा कि लिफाफे में उनके डाकघर की मुहर लगी थी। वहीं रंजीत हत्याकांड में सीबीआई ने अपनी दलीलों में कहा कि इस मामले में पांच आरोपियों किशन लाल, इंद्रसेन, सब्दिल, जसवीर व अवतार के खिलाफ पहले से ही आरोप तय हो चुके है। जहां डेरामुखी के खिलाफ भी पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह के बयान व कुछ अन्य पुख्ता सबूत है।

सिरसा के पत्रकार रामचंद छत्रपति हत्याकांड में सीबीआई ने कहा कि गोली मारने के बाद पुलिस ने दो आरोपी निर्मल और कुलदीप को मौके से दबोचा था। जहां आरोपियों ने खुद से किशनलाल की रिवाल्वर होने व डेरामुखी के षडयंत्र में शामिल होने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में इन दोनों हत्याओं में डेरामुखी पर आरोप तय होने चाहिए। वहीं बचाव पक्ष ने अपनी दलीलों में कहा कि सीबीआई ने डेरामुखी को झूठे मामले में फंसाया है। फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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