दफ्तर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्नी को न दें: नौकरी जा सकती है

रक्षाकर्मी या सरकारी सेवकों के लिए दफ्तर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी को भी देना अपराध है। ऐसी सूचना वह पत्नी को भी दे और पत्नी किसी राष्ट्रविरोधी व्यक्ति तक जानकारी पहुंचा दे तो उसके पति को नौकरी से निकाले जाने का यह पर्याप्त आधार बन जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 नवम्बर को दिए एक फैसले में यह स्पष्ट किया है। न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने कहा कि दुर्भाग्य से आजकल कोई विशेष और गोपनीय सूचना सबसे अधिक लोगों तक पहुंच जाती है। आपने यदि उसे अपने कार्यालय में भी किसी को बताया तो यह एक अपराध है।

उल्लास भट्टाचार्जी की याचिका को निरस्त करते हुए पीठ ने यह टिप्पणी की। उल्लास भारतीय वायु सेना में साजेंट थे। उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्होंने कोई संवेदनशील जानकारी अपनी पत्‍‌नी मुनमुन भट्टाचार्जी को बताई थी। मुनमुन के जरिए वह बात संदिग्ध राष्ट्रविरोधी तत्वों तक पहुंच गई। इसी वजह से उल्लास को 10 फरवरी, 2003 को बर्खास्त कर दिया गया था। उल्लास ने बर्खास्तगी के खिलाफ अपील दायर की थी।

उल्लास 2002 में मध्य प्रदेश स्थित ग्वालियर में तैनात था। तब उसकी पत्‍‌नी ने कथित तौर पर संवेदनशील सूचनाएं अपने पड़ोसी सुशील कुमार और कैलाश को दे दी। दोनों कथित तौर पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंट हैं। उल्लास ने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ पहले दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। वहां से याचिका खारिज हो जाने के बाद उसने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

VN:F [1.9.22_1171]
Rating: 0.0/10 (0 votes cast)
Print Friendly, PDF & Email

2 thoughts on “दफ्तर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्नी को न दें: नौकरी जा सकती है”

  1. सही फैसला, जो लोग इस तरह सुरक्षा में एक छिद्र बना दें उन्हें ऐसी नौकरी करने का कोई हक नहीं।

    VA:F [1.9.22_1171]
    Rating: 0 (from 0 votes)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)