दहेज कानून के अन्तर्गत दर्ज मामलों में 80 प्रतिशत आरोपी बेगुनाह साबित

दहेज मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के दुरुपयोग को लेकर भले ही बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा हो, लेकिन राष्ट्रीय महिला आयोग उसमें कोई ढील देने के खिलाफ है। आयोग की अध्यक्ष डा. गिरिजा व्यास का तो यहां तक कहना है कि ‘यह महिलाओं का ब्रह्मास्त्र है, लिहाजा उसमें कोई भी तब्दीली होनी ही नहीं चाहिए‘। डा. व्यास ने पत्रकारों से बातचीत में यह तो माना कि दहेज निरोधक कानून का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन उसके लिए आईपीसी की धारा 498-ए को खत्म किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उसे लागू कराने वाली एजेंसी (पुलिस) भी अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं कर पाती। संशोधन को लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि दहेज हत्या को रोकने में यह कितना कारगर होगा और उसके दुरुपयोग पर भी अंकुश लगाने में सक्षम होगा या नहीं या महिला आंदोलन के प्रयास के बाद आया दहेज कानून 498 ए भी दहेज उत्पीडन पर जितना भी रोक लगा सका है, कहीं यह संशोधन किए कराए पर पानी न फेर दे।

12 वर्षों में दहेज कानून के अन्तर्गत दर्ज मामलों में कमी के बजाए लगातार वृध्दि हो रही है। 12 वर्षों में दहेज सम्बन्धित मामलों में एक सौ बीस प्रतिशत की वृध्दि दर्ज की गई। इन दर्ज मामलों में 80 प्रतिशत आरोपी बेगुनाह साबित हुए। प्रत्येक पांच मिनट में दहेज कानून के अन्तर्गत एक व्यक्ति गिरफ्तार होता है। न्यायालयों में भी दाखिल होनेवाले मामलों में तीस प्रतिशत से भी अधिक मामले केवल 498 ए के अन्तर्गत आते हैं और इस मामले में बेनुगाह आरोपी की बेगुनाही साबित होने में भी कम-से-कम आठ साल लग जाते हैं।

देश में दहेज की वजह से महिलाओं के उत्पीड़न की बढती घटनाओं को देखते हुए 1961 में दहेज कानून 498 ए अस्तित्व में आया था, लेकिन कानून आने के बाद भी अगर गौर किया जाए, तो दर्ज मामलों में जो साल दर साल कमी आनी चाहिए थी, ईजाफा ही हुआ है। इस दौरान कई ऐसे मामले भी आए जिनका सम्बन्ध दहेज से दूर-दूर तक नहीं था, कुछ मामले घरेलू हिंसा के थे तो कुछ आपसी रंजिश के। घरेलू हिंसा कानून आने के बाद भी ऐसे मामलों में कोई कमी नहीं आई। महिला बाल विकास मंत्रालय का मानना था कि जागरूकता की कमी के कारण जो मामले घरेलू हिंसा के अन्तर्गत दर्ज हो कर कार्रवाई होनी चाहिए थी, दहेज कानून के अन्तर्गत दर्ज हो रहे हैं। कई बार यह बात भी सामने आई कि कुछ महिलाएं ससुराल वालों से बदला लेने के उद्देश्य से भी दहेज कानून के अन्तर्गत उनपर मुकदमा ठोंक रही है। गृह मंत्रालय के आंकडों के अनुसार चार वर्षों में पांच लाख लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें से अस्सी प्रतिशत लोग बेगुनाह साबित हुए हैं। इस कानून पर आरोप लगाया जाता रहा है कि इस कानून की वजह से बुजुर्गों का भी काफी उत्पीडन हो रहा है अगर आंकडों पर विश्वास किया जाए, तो दहेज कानून के घेरे में चार साल में बीस हजार बुजुर्ग गिरफ्तार किए गए ,जिनमें से तेरह हजार सात सौ अड़तालीस बुजुर्ग बेगुनाह थे। फिलहाल इस कानून पर महिला आयोग ने सभी आयामों से विचार कर संशोधन तैयार कर लिया है और मन्त्रालय के पास भेजा जाने वाला है।

माना जा रहा है कि 18 सितम्बर इस कानून के लिए ऐतिहासिक दिन है, मंत्रालय जिस दिन इस कानून में फेरबदल की घोषणा करेगा।
(विभिन्न संचार माध्यमों के सौजन्य से)

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12 thoughts on “दहेज कानून के अन्तर्गत दर्ज मामलों में 80 प्रतिशत आरोपी बेगुनाह साबित”

  1. काम की जानकारी। लगता है दहेज सामजिक मूवमेण्ट से टेकल हो सकता है – कानून से नहीं।

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  2. ह्यूमन राइट्स (मानवाधिकार) मांडवी कच्छ तालुका प्रेसिडेंट जयेश न. गोस्वामी
    आज हमारे देश और समाज सभी राज्यों में दहेज़, स्त्री भुगतान (भारनपोसन) जेसे
    बेफिसुल गलत मामले बहुत बढ़ गए हे, हमारे देश के एक कहावत हे ” एक स्त्री दो कूल तारती निभाती हे” हमारी संस्था में ई अर्जी ओ के हिसाब से आज का पत्नी
    पीड़ित पुरुष वर्ग जेसे तेसे अपने को समय में DHALKER अपनी पत्नी से संजोता केर लेगा पर आज उलटी गंगा ही बहेने लगी हे हमारे देश और समाज में छोटी बातो को लेकर अपने मेके बेथ जाना और पति के घेर वालो को पुलिश और लेडीज क्लायदे कानून की धमकिय देना ये आज की शादीसुदा LADKIYO की बहुत बड़ी गलती बंगई हे , हमारे मानवाधिकार एसोसिएशन के अकडो के हिसाब से और पत्नी पीड़ित पुरुषो की समाधान (midiation ) अर्जी से ये सामने आया हे की कैबिनेट बिल में और हमारे कानून में पत्नी पीड़ित पुरुष को भी सामान हक मिलना चाइये, क्यों की कानून सबके लिए सामान हे, और सबको सामान अधिकार मिले यही हमारे ह्यूमन राईट मानवाधिकार एसोसिएशन और संघ्थानो का अधिकार हे, मूल्य हे…जय हिन्द जय भारत …जयेश. न. गोस्वामी ह्यूमन राइट्स (मानवाधिकार) मांडवी कच्छ तालुका प्रेसिडेंट, एड्रेस:- SANJIPADI,
    मांडवी-कच्छ (गुजरात) मोबाइल- 09879842855

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  3. ह्यूमन राइट्स (मानवाधिकार) मांडवी कच्छ तालुका प्रेसिडेंट जयेश न. गोस्वामी
    आज हमारे देश और समाज सभी राज्यों में दहेज़, स्त्री भुगतान (भारनपोसन) जेसे
    बेफिसुल गलत मामले बहुत बढ़ गए हे, हमारे देश के एक कहावत हे ” एक स्त्री दो कूल तारती निभाती हे” हमारी संस्था में ई अर्जी ओ के हिसाब से आज का पत्नी
    पीड़ित पुरुष वर्ग जेसे तेसे अपने को समय में DHALKER अपनी पत्नी से संजोता केर लेगा पर आज उलटी गंगा ही बहेने लगी हे हमारे देश और समाज में छोटी बातो को लेकर अपने मेके बेथ जाना और पति के घेर वालो को पुलिश और लेडीज क्लायदे कानून की धमकिय देना ये आज की शादीसुदा LADKIYO की बहुत बड़ी गलती बंगई हे , हमारे मानवाधिकार एसोसिएशन के अकडो के हिसाब से और पत्नी पीड़ित पुरुषो की समाधान (midiation ) अर्जी से ये सामने आया हे की कैबिनेट बिल में और हमारे कानून में पत्नी पीड़ित पुरुष को भी सामान हक मिलना चाइये, क्यों की कानून सबके लिए सामान हे, और सबको सामान अधिकार मिले यही हमारे ह्यूमन राईट मानवाधिकार एसोसिएशन और संघ्थानो का अधिकार हे, मूल्य हे…जय हिन्द जय भारत …जयेश. न. गोस्वामी ह्यूमन राइट्स (मानवाधिकार) मांडवी कच्छ तालुका प्रेसिडेंट, एड्रेस:- SANJIPADI,
    मांडवी-कच्छ (गुजरात) मोबाइल- 09879842855
    वे फाइट तो राइट्स SABHI मूल्यों का अधिकार हमारा मानवाधिकार

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  4. इस आलेख व्यक्त विचारों से पूर्णता सहमत हूँ. ऐसे मामलों में ठोस कार्यवाही करते हुए किसी लडके का जीवन बर्बाद करने के लिए जब तक सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज दहेज के झूठे मामलों में लड़की के परिजनों और पुलिस के अधिकारीयों को सिर्फ डांटने/सलाह देने के अलावा उनपर सख्त कार्यवाही नहीं करती हैं. तब तक यह “क़ानूनी-आतंकवाद” रुकने वाला नहीं है.
    ऐसे आदेशों को पुलिस अधिकारी रद्दी की टोकरी में फैंक देते हैं. यदि ऐसे आदेशों को मानने लग गए तो उनके बच्चे भूखे(सैलरी से पेट नहीं भरता है, बहुत कम होती है ) मर जायेंगे, क्योंकि यदि सुसराल वालों के जितने ज्यादा से ज्यादा सदस्यों का नाम होगा. उतनी ही मोटी रकम मिलेगी. जब मोटी रिश्वत नहीं मिलेगी तब तक गिरफ्तारी का भय दिखाकर परेशान करते रहेंगे.

    क्या “महिला आयोग” को मालूम है कि “वुमंस सैल” में पीड़ित से “रेप” की कोशिश भी होती है ?

    मैं आपको अपना एक छोटा-सा उदाहरण देता हूँ कि मेरे और मेरे परिजनों के नाम मुकद्दमा दर्ज होने के लगभग अठारह महीने बाद एक दिन आए मेरी पत्नी के फोन पर बताया था. हमें वुमंस सैल वालों ने कहा था कि अपने पति के भाइयों आदि का भी नाम लिखवा दो और तुम्हारे खिलाफ ही हमारा मामला मजबूत नहीं बन रहा था. इसलिए अश्लील फोटो और वीडियो बनाने आदि के आरोप लगाने पड़े है. मैंने बिना दहेज लिए “कोर्ट मैरिज” की थी. फिर पुलिस ने रिश्वत लेने के लिए कभी मेरे भाइयों की जमानत रद्द करवाने के लिए धमकी दी और मेरी जमानत सुप्रीम कोर्ट में भी न होने देने की और मेरे गुप्त अंग पर करंट लगाने की धमकी देकर परेशान रखा. आखिर में कोर्ट में “आत्मसमपर्ण” किया और निर्दोष होते हुए भी एक महीना तिहाड़ जेल रहकर आ चुका हूँ. अब आने वाले समय में सभ्य युवा भी हथियार उठाकर अपराध नहीं करेगा तो क्या करेगा ? यदि मेरी पत्नी के कथन को सत्य मानते हुए मेरे खिलाफ मुकद्दमा दर्ज हो सकता है तो मेरी पत्नी का तो यह भी कहना है कि “वुमंस सैल” के एक अधिकारी ने उसका “रेप” करने का प्रयास भी किया था और जान से मारने की धमकी भी दी. कानून बनाने वालों की और महिला आयोग की यह कैसी कार्यशैली है महिलाओं का इंसाफ दिलवाने की रणनीति. क्या इसी प्रकार की रणनीति को अपनाकर महिलाओं को इंसाफ दिला जायेगा ?

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  5. एक बेबस युवा की टिप्पणी देखें-आजकल बलात्कार(धारा 376) के मामले कम दर्ज होने लगे है लेकिन…..दहैज प्रताडना(धारा 498 अ)के ज्यादा मामले सामने आ रहै और वो भी 94% झुठे है.फिर भी सरकार जाने कब जागेगी ?

    हमारी टिप्पणी-सरकार को नीचे से ऊपर तक हिस्सा पहुँच जाता है, तब जागने की क्या जरूरत है ? आज जागने की जरूरत तो युवाओं और देशवासियों को हैं. आज उनको संगठित होकर बेहतर न्याय व्यवस्था(आवश्यकतानुसार अदालतों का निर्माण) बनाने की मांग करना जरुरी है. आज के समय में पुलिस वालों और कुछ वकीलों(जिनका नैतिकता पतन हो चुका है) के दहेज प्रताड़ना ((धारा 498 अ) मामले देखते ही आँखों में जितनी चमक आती है. उतनी तो किसी अन्य मामलों में भी नहीं आती है. हर आदमी की गिरफ्तारी का भय दिखाकर पुलिस लुटती है और फिर हर आरोपी की जमानत करवाने की फ़ीस वकील को मिलती है और तोहफे में एक साथ अनेको केस भी मिलते है. जैसे-बच्चों की कस्टडी, तलाक, गुजारा भत्ता आदि. इससे बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा अपना जीवन नष्ट भी कर रहे है.

    हमें (पत्नी पीड़ित) एकजुट होना होगा और मौत (जब मौत आनी होगी तो सात तालों में भी आ जायेगी.मौत एक दिन सब को आनी है. फिर हम मौत से क्यों डरें ? मौत से वो डरें जो गलत करता है.मौत एक कड़वा सच है. इसको जितनी जल्दी स्वीकार कर लें, उतना अच्छा होता है.मैं तो बस यह कहता हूँ कि आप आये हो, एक दिन लौटना भी होगा. फिर क्यों नहीं तुम ऐसा करो कि तुम्हारे अच्छे कर्मों के कारण तुम्हें पूरी दुनिया हमेशा याद रखें. धन-दौलत कमाना कोई बड़ी बात नहीं, पुण्य कर्म कमाना ही बड़ी बात है) का डर निकालकर आने वाली पीढ़ी के कुछ अच्छा करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे.

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  6. कमल हिन्दुस्तानी का कहना है कि-आजकल धारा 498a निर्दोष व शरीफ पतियों को क्रिमिनल बनाने में बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रही है और बची-खुची कमी हमारी पुलिस पूरी कर देती है | जब एक शरीफ और इज्जतदार पति को धारा 498a के तहत झूठे केस मैं फसाया जाता है, तब वह मानसिक तोर पर हराश हो जाता है क्योकि उसकी शराफत का पुलिस द्वारा नाजायज फायदा उठाया जाता है और कदम कदम पर उसको बेइज्जती सहन करनी पड़ती है. बिना वजह उसको जेल मैं जाना पड़ता है तब उसकी सारी अभी तक की कमाई हुई इज्जत एक मिनट मैं बर्बाद हो जाती है और पुलिस सब कुछ छानबीन करने के नाम पर पति का शोषण करती है. इस सब से तंग आकर पति अक्सर सोचते है कि इससे तो मौत को गले लगाना ही ज्यादा अच्छा है या फिर उसके दिमाग मैं बदले की भावना जन्म ले लेती है.फिर वह जेल से निकलते ही अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से बदला लेने की सोचने लगता है | जैसे अभी कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश मैं हुआ था. वहां पर पति ने अपने ऊपर लगाये झूठे केसों की वजह से जेल से आते ही ससुराल पक्ष के 6 लोगो की हत्या कर दी थी |लेकिन हमारी सरकार तो केवल अपनी वोट बैंक की खातिर कानून बनाती है. उसका अच्छा या बुरा असर नहीं देखती और न ये देखती है कि धारा 498a मैं औरत को ही औरत का की दुश्मन बना दिया है और पुलिस के लिए कमाई का साधन ……….

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  7. किन्तु देश में समुचित कानूनी उपायों के अभाव में पक्षकार इस प्रावधान का उपयोग करतेहैं| महिला पक्ष कई बार पीड़ित होता है किन्तु अन्य किसी प्रभावी उपाय के अभाव में इस प्रावधान का सहारा लेता है यह भी एक विडम्बना है|

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  8. सेर मेरा नाम हबीब हे मेरी पत्नी ने अपनी बेहेन और मुह बोले भाई कि बातो में अ केर दूसरी शादी केर ली हे में किया केरु सेर बात यहे हे कि आज से ६ साल पहेले हमाri आपस कहा सुनी हो गई मेने अपनी पत्नी कि बहन को फ़ोन केर बुला लिया मेने उसकी गलती बताई तो पत्नी कि बहन मेरी गलती बताने लेगी और जिद गई कि में अब अपनी बहन को तलाक दिल केर ले केर जाउगी वेरना तुम्हारे खिलाप केस केर दुगी कियोकी मेरी एक शादी पहले भी हो क्युकी थी जिसका केस आज भी चल रहा हे इसी दर से मेरे परिबार ने उसकी बात man ली और 50 रुपए के इस्तम पेपर पर तलाक नामा बनबाया जबकि हम एक दूसरे स अलग नही होना फिर भी उसकी बहन उसको ले गई तलाक नामा बनने बाद ६ महीने बाद मेरी पत्नी अपनी बहन के घेर से भाग आई और कहने लेगी अगेर तुम मुजको नही रेखो गए तो में मेर जाउगी फिर में उसको लेकर फतवा लेने गया हमने सारी कहनी बताई फतवा में बताया कि तुम दोनों कि जेबर जस्ती कि तलाक नही हुई एक साल बाद हमारी एक लरकी हुई जो मेरी हुई थी उसके बाद कोई बचा नही होआ अब मेरी शादी को सात साल हो गए एक दिन मेर बीबी अपने मुह बोले भाई क साथ कुछ दिन क लिए मिलने गई तब से आज तक नहीं लोटी और उसको गए हुए ८/९ महीने हो गए वो मेरे घर आने को मेन करने लेगी हम दोनों केबी केबी मिलते गुमते और में उसको खर्चा भी देता और सम्बंद भी बनाते ? पाच महीने मेरी बीबी नही मिला मेने उसकी बहन का न्य घर मुजको नही मलूम मेने उसकी बहन का घर काफी डुंडा पैर नही मिला किसी तेर उसके बहनोई का फ़ोन नम्बर मिला जेब मेने फोन केरकर पूछा तो उसके बहनोई ने बताया कि तेरी बीबी कि शादी उसके मुह बोले बाई के छूटे भाई से हो गई हे और इधर आया तो बोहत पिटेगा और तू हमारा कुछ नही केर सकता कियोकी हमारे पास पहले वाला तलाक नामा हे जेब में अपनी बीबी से बात करने को कहा तो एक दो दिन बाद मेरी बात हुई जो कि उसने आने को मेन केर दिया हे और बताती कि मेरी शादी हो गई हे और आज के बाद यहाँ फोन नही करना नही तो अछा नही होगा सर मेरी बीबी ने २५००० हजार रुपए अपने मुह बोले भाई को दिलवाए कहती कि भाई अपने घर में केमरा बनाएगे जिसमे हेम दोनों रहगे और जेबर बी हे अगर म उस पैर कोई केस करता हु तो वो मुज पर केस करने को कहती हे

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  9. मेराविवाह हिन्‍दूविवाहअधिनियम;१९५६केतहत२२फरवरी२०१३मेंहुआथााजिसकानामसोनूमीणाहैाउसकीशैक्षणिकयोग्‍यताएम;ए;एम;ऐडहैालेकिनमेरीपत्‍नी२००३से२००८तकसुसरालनहींआयीमैंने१३जून२००८कोदूसराविवाहकियाहैापहलीपत्‍नीकोलानेमैंनेबहुतप्रयासकियाथाालेकिनवहनहींआयीपरिवारतथावंशावलीचलानमेंलियेमेरेदूसराविवाहकरलियालेकिन२०११कोमेरीपत्‍नीमुझपरदहेजतथादूसराविवाहकरनेतथाभरणपोषणमुकदमा कियामैंएकअनुसूचितजनजातिकाहॅूहिन्‍दूविवाहमेंभरणपोषणकापहलीपत्‍नीकाहिस्‍साबनतीहैाकिनहींमुझउचितसमाधानबतायेा

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  10. मेराविवाह हिन्‍दू विवाह अधिनियम १९५६ के तहत २२ फरवरी २००३ में हुआ था जिसका नाम सोनू मीणा हैा उसकी शैक्षणिक योग्‍यता एम;ए;एम;ऐडहैा क्‍या शिक्षित महिलाकोभरण पोषण राशिआवश्‍यकता आपकी रायमेंा लेकिन मेरीपत्‍नी२००३से२००८तकसुसरालनहींआयीमैंने१३जून२००८कोदूसराविवाहकियाहैापहलीपत्‍नीकोलानेमैंनेबहुतप्रयासकियाथाालेकिनवहनहींआयीपरिवारतथावंशावलीचलानमेंलियेमेरेदूसराविवाहकरलियालेकिन२०११कोमेरीपत्‍नीमुझपरदहेजतथादूसराविवाहकरनेतथाभरणपोषणमुकदमा कियामैंएकअनुसूचितजनजातिकाहॅूहिन्‍दूविवाहमेंभरणपोषणकापहलीपत्‍नीकाहिस्‍साबनतीहैाकिनहींमुझउचितसमाधानबतायेा

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  11. सर मै भी इस ४९८अ धारा का भुक्तभोगी हु। मेरी पत्नी ने मेरे मेरे उपर ये केस किया है जिसमे मेरे उपर प्रताड़ना का केस(१७/०९/२०१४) किया है ।मेरी शादू को १४ वर्ष हो चुके है। उसने मेरे उपर एक और आरोप लगाये है की उसने बीती रात को मुझे एक किरायेदार के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा है जिसके कारण मैंने और किरायेदार(फीमेल) ने मिलकर मार जिस्स्जे कारन उसने महिला थाना में जाकर केस किया। ऐसा मेरी पत्नी ने केस फाइल करते हुवे लिखा है। जबकि मै १२/०९/२०१४ से२२/०९/२०१४ तक मत वैष्णोदेवी का दर्शन करने एवँम घुमने बहार गया था जिसे साबुत के रूप में रेल टिकट,विडिओग्राफी,फोटो,और हटेल के बिल है।जबकि सच्चाई ये है की मेरी पत्नी और उसके घर वाले मानसिक रूप से मुझे १२ साल प्रताड़ित किया जा रहा है जिससे मई तंग आकर २ साल पहले तलाक के लिए फाइल कर चूका हु और मेरी उसमे हाजिर नही हुइ जिस्के चलते जज ने एकतरफा करवाई का आदेश दिया है ।मेरी गवाही भी हो चुकी है। जिसके कारन मेरी पत्नी ने मुझे परेसान करने के लिए ये केस किया है। जिसके कारन मै बहुत ही परेसान हु ।कृपया आप मददकरे

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  12. एक स्त्री कितनी बार अपने ससुराल वालों पर 498a का केस कर सकती है

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