अपने आदेशों की समीक्षा नहीं कर सकती अदालतें

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि लिपिकीय या गणितीय भूल को छोड़कर अदालतों को अपने आदेश या फैसलों की समीक्षा की कोई निहित शक्ति प्राप्त नहीं है। सीआरपीसी की धारा 362 का उल्लेख करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रक्रिया संहिता के मुताबिक कोई भी अदालत जिसने किसी मामले में अपने निर्णय या फैसले पर हस्ताक्षर किए हैं, क्लरिकल या गणितीय भूल के सिवा उसकी समीक्षा नहीं सकती है। न्यायमूर्ति तरूण चटर्जी और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की पीठ ने कहा कि किसी भी असंतुष्ट व्यक्ति के लिए एक ही तरीका है कि वह ताजा और अतिरिक्त सबूतों का उल्लेख कर उक्त आदेश या फैसले की समीक्षा के लिए ताजा याचिका दाखिल कर सकता है।

शीर्ष अदालत ने यह बात मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज करते हुए कही जिसमें सीबीआई को राज्य के वन विभाग में तस्करी के आरोपों और कथित घोटाले को उजागर करने वाले स्थानीय राजस्व संभागीय अधिकारी व शिकायतकर्ता केवी राजेंद्रन को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने की जांच का आदेश दिया था।

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  • 362 सीआरपीसी

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