विधि आयोग ने उत्तराधिकार कानून में संशोधन का सुझाव दिया

विधि आयोग ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अनुच्छेद-213 को हटाने का सुझाव दिया है ताकि इस कानून के भेदभाव पूर्ण प्रावधानों को हटाकर सभी धर्मावंलबियों पर उत्तराधिकार संबंधी व्याख्या समान रूप से लागू की जा सके। आयोग के अध्यक्ष तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एआर। लक्षमण ने आज इस संबंध में अपनी रिपोर्ट विधि मंत्री हंसराज भारद्वाज को पेश कर दी।

विधि आयोग ने सुझाव दिया है कि भारतीय उत्तराधिकार कानून 1995 के अनुच्छेद-213 को हटा दिया जाए। अनुच्छेद-213 को सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू नहीं किया जाता है।

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33 thoughts on “विधि आयोग ने उत्तराधिकार कानून में संशोधन का सुझाव दिया”

  1. puri kahani batani padegi kya aapka email mil sakta hai agr aapti na ho to,main aapse khud hi sampark kar lungi .agr koi samsya hai to main yhan bhi bata sakti hun .jaisa aap kahen.

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  2. लवली जी, ई-मेल आईडी, प्रोफाइल में प्रदर्शित हो ही रहा है!

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  3. jee maine dhyan nahi diya tha.jaldi hi sampark karugi.twrit pratikriya ka dhanyawad

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  4. लोकेश जी नमस्कार
    मुझे एक केश के सम्बन्ध में जानकारी चाहिए.कहानी यह है की एक आदमी ने अपनी पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह किया .मुक़दमा दायर करने पर ३०० रूपये प्रतिमाह का फैसला हुआ.पहली पत्नी के २ बेटियों की शादी हो गई है जिसमे उसने कोई मदद नही की न ही पत्नी के रहने के लिए कोई स्थायी जगह का इन्तिजाम किया .एक की शादी नही हो पाई वह मंदबुद्धि है.वैसे इसकी शादी के लिए ५०००० रूपये का आदेश रांची हाई कोर्ट से हुआ है.पर मैं जानना चाहती हूँ की क्या हिंदू उतराधिकार कानून अविवाहित पुत्री को जयजात में अधिकार देता है.अगर उस पुत्री की शादी नही हो पाई तो उसके पुरखों की सम्पति में क्या उसका हक़ बनता है.उसकी संरछिका उसकी माता है .और पिता की दूसरी पत्नी से ३ संतान और भी है.जिन्हें उसने रिटायर्मेंट की सारी सम्पति और जयजात लिख दी है.आपके जवाब का इन्तिज़ार रहेगा.

    सादर लवली,

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  5. लवली कुमारी जी का प्रश्न है……

    क्या हिंदू उतराधिकार कानून अविवाहित पुत्री को जयजात (जायदाद) में अधिकार देता है.अगर उस पुत्री की शादी नही हो पाई तो उसके पुरखों की सम्पति में क्या उसका हक़ बनता है?

    उत्तर-

    * लवली कुमारी जी के प्रश्न का प्रथम भाग केवल उत्तराधिकार के सम्बन्ध में है। हिन्दू उत्तराधिकार कानून में पुत्री को अपने पिता या माता से उत्तराधिकार में उतना ही प्राप्त करने का हक है जितना कि एक पुत्र को। लेकिन उत्तराधिकार तो तभी लागू होता है जब कोई व्यक्ति मृत्योपरांत कोई निर्वसीयती सम्पत्ति छोड़ जाता है। उत्तराधिकार किसी मृतक की छोड़ी हुई सम्पत्ति पर होता है। किसी पुरुष की मृत्यु पर पुत्र, पुत्री, विधवा पत्नी, माता, पूर्वमृतपुत्र का पुत्र, पूर्वमृतपुत्र की पुत्री,पूर्वमृतपुत्री की पुत्री, पूर्वमृतपुत्र की विधवा, पूर्वमृतपुत्र के पूर्वमृतपुत्र का पुत्र, पूर्वमृतपुत्र के पूर्वमृतपुत्र की पु्त्री तथा पूर्वमृतपुत्र के पूर्वमृतपुत्र की विधवा प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी हैं। किसी भी हिन्दू पुरुष की मृत्यु पर उस की निर्वसीयती सम्पत्ति में उक्त प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारियों का समान अधिकार निहित हो जाता है।

    * प्रश्न का दूसरा भाग पुरखों की सम्पत्ति से है। ‘पुरखों की सम्पत्ति’ जैसी कोई सम्पत्ति होती ही नहीं है। ‘संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति’ होती है, संभवतः लवली कुमारी जी उसे ही पुरखों की संपत्ति कह रही हैं। किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसकी संपत्ति का विभाजन नहीं होने पर वह ‘संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति’ कहलाती है। इस संपत्ति में सभी उत्तराधिकारियों का भाग इस उत्तर के पहले भाग की भांति समान रूप से अवस्थित रहता है। किसी एक सहभागी की मृत्यु उपरांत उस के पुरुष उत्तराधिकारी भी उस संपत्ति में समान भाग के सहभागी होते है। इस संपत्ति में महिलाओं का कोई भाग नहीं होता। लेकिन अविवाहित पुत्रियों और विधवाओं को भरण पोषण और उस संपत्ति में निवास करने का अधिकार जीवन काल के लिए प्राप्त होता है। लवली कुमारी जी द्वारा प्रस्तुत मामले की पृष्ठभूमि स्पष्ट नहीं है। अर्थात् ‘संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति’ कैसी है? वह कैसे बनी? और कौन कौन उस के सहभागी हैं? जब तक इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिल जाता है, तब तक सही उत्तर देना संभव नहीं है। उत्तर मिल जाने पर भी नए प्रश्न उत्पन्न हो सकते हैं। उन्हों ने जिस महिला के लिए प्रश्न उठाया है वह वकीलों के संपर्क में है। उत्तम तो यह है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर ‘संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति’ मामलों के जानकार वकील से संपर्क कर के इस प्रश्न को तय करना चाहिए। मेरे विचार में उस महिला को ‘संयुक्त हिन्दू परिवार की अविभाजित संपत्ति’ में केवल भरण पोषण और उस संपत्ति में निवास करने का अधिकार प्राप्त है।

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  6. sir meri sister ki shadi 13 sal pehle hoi thi. lekin sister ke sasoral wale dahez ke lalchi nikle. aur bar bar mere papa se paise ki farmais karte rahe. aur papa use pura karte rahe.
    lekin kuch din se unhone 50 thousand ki mang ki . pura na karne par sister ko mara aur kerosin oil dal kar aag lagane ki kosis. hamara ghar pass main hi hone ki wazah se hum zald hi moke par pahunch gaye aur sister ko lekar police station gaye. lekin dosri parti bhi apni ladies ko lekar police station aa gaye aur hamare upar ghar main ghush kar marpeet ka aarop lagana lage. unka politics dawab hone ki wazah se police ne hamara case file nahi kiya aur sath hi dosri party ki bhi koi case file nahi kiya.
    hamne koi bhi maarpeet unke sath nahi ki thi wo sirf cross f.i.r darz karane ke liye unki sajish thi.
    isliye meri aap se guzarish h ki zald se zald mujhe sahi masware de

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  7. mere baba apne teen beto mai se do ke naam vasiyat kar gaye hai mere papa ko life time tak rahne ki permission hai per meri mummy aur humare liye koi permission nahi hai . aisa koi kanun hota hai ki mere papa ka haq unko wapas mil jaye.

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  8. सर नमस्कार,

    मेरा सवाल ये है की बिना वसीयत करी हुई प्रोपर्टी ही पुश्तैनी प्रोपर्टी कहलाती है , हिन्दू एक्ट के हिसाब से और अगर मेरे दादा को १९४७ में बिना वसीयत करी प्रोपर्टी मिली है तो वो अविभाझित संपत्ति कहलाएगी और उनकी की हुई वसीयत वैध नही मणि जाएगी और उसपर मेरी बहन का अधिकार भी होगा किर्पया बताने की किरपा करे

    सादर
    दीपक कुमार

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    1. जो संपत्ति आप के दादा जी को उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है यदि वह आप के दादा जी के पिता की स्वअर्जित संपत्ति थी तो वह पुश्तैनी नहीं थी। लेकिन यदि दादा जी ने उस संपत्ति के बारे में अपने जीवन काल में कोई वसीयत नहीं की या उसे किसी तरह से स्थानान्तरित नहीं किया और वह उन के उत्तराधिकारियों को पुनः उत्तराधिकार में प्राप्त हुई है तो फिर वह पुश्तैनी संपत्ति हो चुकी है।

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      1. सर नमस्कार

        सर मुझे अगर ये पता लगाना है की मेरे दादा को वसीयत में जमीन मिली है या नही इसके लिए मुझे सूचना अधिकार अधिनियम २००५ के तहत अपने परदादा की फरद या वसीयत तहसील से निकलवानी होगी किर्पया बताने की किरपा करे.

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  9. मेरे पिताजी और माँ का दिवोर्से केस ३३ साल से चल रहा था. अब तक दिवोर्से नहीं हुआ. हम तिन बहेने है.क्यों की उन्होंने अबतक कोई खर्चा नहीं दिया था. पिछले साल वो नहीं रहे. वो अपनी भाभी के साथ ३३ साल से रहे रहे है. जो विधवा है. उनको उनसे सदी करनी थी. उन्होंने मरते कोई विल नहीं की. मेरी माँ और में लीगल हक़दार है. पर वो फ्लैट में भाभी रहे रही है. जो अपना हिसा ५०% माग
    रही है. क्या उसका हक़ लगता है और उसे घर से निकलने के लिए क्या हम उसे निकल सकते है. फ्लैट ओव्नेर्शिप है और मेरे पापा के नाम पे है. पर सोसाइटी सेक्रेटरी ने कहा की उसने फ्लैट भाभी के नाम पर कर दिया है. क्युकी एक ख़त में नॉमिनी पिताजीने भाभी को बनाया है. जबकि पिताजी को परलिसेस की बजे से लिख नहीं पते थे. किसी और ने लिखा है क्या वो ख़त विल कहा जा सकता है. और अब तक हमें कुछ नहीं मिला है. तो वो फ्लैट में रहने जा सकती हु! वो हमारे नाम पर हो सकता है! क्या में उस भाभी को निकल सकती हु!

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  10. क्या हिन्दू कानून में उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति होती है उस में पत्नी और संतानों आदि अधिकार भी सम्मिलित होता है,?क्या कोई उत्तराधिकार से प्राप्त सम्पति को बसियत कर सकता है ? यदि किसी ने बसियत कर दी हो तो क्या करे ?कैसे दाबा करे , प्लीज उत्तर दे . धन्यवाद , pksaxena

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  11. Mere retired father ki death 12 aug 2012 ko hui hai, Meri maa aur Mai unki akeli putri huin. Mera vibha 29jan2007 ko hua tha. mere father ka ek house shajahanpur city mai hai.jo उन्होंने 2002 me khareda tha, 25 bigha ag लैंड home district hardoi me hai. death ke 2month ke bad ek बसियत मिली jisme उन्होंने 14dec 2006 ko बसियत likhbai & १४ jan2007 me regd. hui hai, jisme unhone samast land & house achal sampati apne chote bhai ko likhbadii hai evam maa ko keval chal sampati likhi hai, jo hai he nahi, केवल penshion है,yeh baiyat mere vibah se purv mein bani hai, meri maa ke sath anaya hua hai? pl give me leagal help?what can i do???? how i get my property. हाउ कैन गेट माय आल सम्पति, papa ne apne chote bhai apne sath rakha evem education dilai evam marrige ki, mere chacha ki khud ki bhi 25 bigha ag land hai, उनके कोई औलाद भी नहीं है.ab boh meri maa ko pareshan kar rahe hain.origional बसियत ko maine destroy kar diya hai. pl immediat suggest. व्हाट कैन इ दो? ,,,shishta saxena….

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  12. पता नहीं कितने साल में होगा उफ़!!! यह संशोधन. ऐसा ही एक संशोधन धारा ४९८अ में भी होना था. काफी साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था. मगर आज तक फाइलों में ही पड़ा हुआ है और लाखों घर बर्बाद हो रहे है.

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  13. ek prashn yah hai ki meri dadi ke naam par 1984 mein pitaji ne ek flat liya jiska kabja 1987 mein mla aur hamara char sadasyo ka priwar waha par rah raha hai 1987 mein dadi ki death ho gayee aur 2007 mei jaker pitaji ne ek affidevit deker ki main ekmatr santaan hoon makan ki registry apne naam se kara lee. sabhi kisht aur sabhi karya pitaji ne karwaya tha. ab unk bhi 2012 feb. mein dehant ho gya hai hai… pitaji ke ek bhai hain pahle unhone registry ke samy moukhik sahmati di thi parantu ab wo makan mein apna hissa maang rahe hai… unka kahna hai ki pitaji ne dhoke se apne naam registry karayee hai….
    aapki kya salah hai???

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  14. मेरी दादी के भाई(फतेसिंग) ने जो की निसंतान थे उसने मरने के पहले मेरी दादी के बहु जो मेरी माँ थी उसके पक्ष में वसीयत लिख दिया था उसके दो महीने बाद उनकी मौत हो गई / उनकी मौत के बाद उसकी पत्नी को किशी अन्य व्यक्ति के साथ जो उसका भतीजा बताता था उसने भी फतेसिंग की पत्नी से वसियानमा लिखवा लिया अवं फतेसिंग की पत्नी से भांजा बहु पर केश डलवा दिया और फतेसिंग की लिखी वसीयत को गलत साबित कर रहे है एक बार हम तहसील कार्यालय से जीत चुके है फिर सिविल व्यवहार न्यायलय में हमारी हर हो चुकी है उनके अनुसार हमारी वसीयत कुत्रचित है हमने हमारा केश उतराधिकारी से नहीं लड़ा है हम आदिवाशी गोंड में आते है क्या आदिवाशी गोंड में महिला को किशी अन्य व्यक्ति को वसीयत करने का अधिकार होता है या हमारी दादी की सम्पति हमे प्राप्त होंगी या नहीं हम फतेसिंग के उत्तराधिकारी है और जितना हुक फतेसिंग का था उतना ही हुक हमारी दादी का था अगर कोई धaरा हो तो मुघे बताये या सुघव de

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  15. सर नमस्कार यह समस्या मेरी माॅ की है मेरी माॅ की आय का स्त्रोत कृशि कार्य से ही हैं मेरी माॅ के नाम से 4 एकड की जमीन सीधी जिले में है जो कि वह जमीन मेरे बाबा के जमाने में सरकारी खाता था और मेरे बब्बा का कई सालो से काबिज होेने से पट्टा हो गया फिर बब्बा जी के बाद बारिष में मेरे पिताजी के नाम हुआ फिर मेरे पिताजी ने उस जमीन का नामान्तरण मेरी माता जी के नाम करा दिया। मेरे बब्बा जी तीन भाई थे अंषमान सिंह, यादवेन्द्र सिहं और राघवेन्द्र सिंह और एक सहदायी जमीन 1एकड की ऐसी थी जो कि गांव के नागेन्द्रनाथ सिंह जो फर्जी कूटरचित दस्तावेज तैयार करके कि हमारे बडे बब्बा अंषमान सिहं के लडके धनपति सिंह के फर्जी हस्ताक्षर करके तथा छोटे बब्बा को निर्वष दिखाकर और हमारे बब्बा का कोई उल्लेख न करकर उस जमीन को अपने नाम नामान्तरण करा लिया। लेकिन काबिज बब्बा लोग ही थ्ेा। जब पता चला तो हमारे पिताजी द्वारा रेवेन्यू न्यायालय में वाद दायर किया गया तो चूकि नागेन्द्रनाथ सिह का राजनीतिक पकड एवं आर्थिक रूप से संम्पन्न होने से तहसीलदार न्यायालय से फैसला अपने पक्ष में करवा लिया तथा एस.डी.एम. न्यायलय में अपील करने पर भी वहां से निरस्त कर दिया गया फिर उसके बाद कमिस्नर न्यायलय में अपील करने पर आज सन् 1़992 से प्रकरण की कोई सूनवाई नही हुई।
    यह कि जब सहदायी सम्पति का आपसी बटवारा हुआ तो सभी सहदायी सम्पति बाटने के बाद उस उपर्यक्त फर्जी नामान्तरण वाली सम्मत्ति को भी तीन हिस्सो मे बाट दिया गया जो कि मेरे माॅ के नाम वाली सम्पति के सीमा से लगी थी लेकिन वास्तव में सीमा के ज्ञान के आभाव में करीब आधा एकड हमारी माॅ के नाम वाली संपत्ति में वे लोग कबिज हो गए।क्योकि उस समय न तो रेवेन्यू विभाग से हमारी माॅ वाली संम्पति का सीमांकन हुआ था और न ही उस सहदायी सम्पति का लेकिन जब हमारे छोटे बब्बा के पुत्र लोग सीमा सम्बन्धी विवाद करने लगे तो हमारी माता जी द्वारा अपने जमीन का सीमांकन कराया गया तो माॅ की जमीन की सीमा जहाॅ वो लोग जुताई कर रहे थे वहा तक निकल गयी।
    और अब हमारे छोटे बब्बा के भाईयो द्वारा जो कि नागेन्द्रनाथ से मिलकर बोलने लगे कि यह सम्पत्ति सहदायी है और यह हमको हिस्सा बटवारा में मिला था । और हमारा हिस्सा और होता है जो कि अभी कम है और वो जो कूटरचित जमीन है वो तो नागेन्द्रनाथ सिंह की है हम लोग उनसे क्यो लें हमारी संपत्ति यही हैं और इस तरह से जबरन और कब्जा कर लिए चूकि हम बाहर रहकर पढाई कर रहे है घर मेें माॅ और पिताजी रहते है जो कि वृद्व है और हमारे छोटे बब्बा जी के 5 लडके है और आर्थिक स्थिति भी ठीक है तथा राजनीतिक लोगो से पकड भी है जो कि दो वर्ष से हमारी माॅ के साथ अपराध कर रहे है जब हमारी माॅ की जमीन की बुवाई हो गई थी तो उन लोगो ने उसको फिर से जुतवंा कर पूरी फसल नष्ट करवा दी थ्ीा तथा जो कुछ भी शेष बचा था उसको भी आठ दस लोग मिलकर गाडी में भरकर उठा ले गये फिर माॅ की जमीन पर निषेधज्ञा रेवेन्यू कोर्ट से लगवाना चाहा तो कोर्ट ने उसको निरस्त कर दिया जिस पर उन्होने कहा कि हम कोर्ट का फैसला नही मानते हमाने साथ पुलिस और प्रषासन है और अपने बल पर सभी जमीन पर रोक लगा देगे क्योकि सभी राजनीतिक लोग हमारे पक्ष में तथा पुलिस को पेेैस से खरीदलेगे इस तरह से जब अभी जुलाई 2013 में फसल के लिए माॅ द्वारा जुताई कराने गई तो आठ दस लोग पहुचकर जुताई करने वाले को भागा दिए तथा सहदायी सम्पति को भी रोक लगा दिए और गाएिया देने लगे और बोले जो कोई इस जमीन पर आएगा हम लोग उसको जान से मार देगे । इस तरह से प्रत्येक घटना का पुलिस में रिपोर्ट करने पर पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नही होती यहाॅ तक पुलिस अधीक्षक एवं कलेक्टर को भी बार बार आवेदन देने पर भी कोई कार्यवाही नही हो रही है जिस तरह से अपराधियो का मनोबल बढता चला जा रहा है और उनका मकसद है कि इनका आय का स्त्रोत केवल कृषि ही है तो इनका आय को ही खतम कर दिया जाय जिससे ये वैसे ही बर्बाद हो जाएगे और पैसे की कमी की वजह से ज्यादा दूर तक न्याय के लिए लड भी नही सकते
    तो सर् हमको कोई ऐसा समाधान बताइए कि नागेन्द्रनाथ सिह और हमारे परिवार के लोगो को जल्दी से जल्दी सजा मिल सके तथा हमारी सम्पति हमको मिल जाए तथा हमको न्याय मिल सकें।

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  16. sir mera nam mahadeo sonde hai,mere prashna aisa hai……meri mavsi unone mere mama ko 1 saal ka tha tabse uska palan poshan kiya.padhaya vivia kiya….lekin mere mama me shadike baad usme kuch parivartan hogya hai ki o dono pati patni ghar bechne nikle hai .lekin reshnig card mere movsi ke naam par hai……or o movsiko unka naam hatvane ko kahte hai…..en dono pati patnika karastan de khar …
    .movsi aapna bhi hak mangrahi hai…………..or o abhi dhamki dete hai ki ham kubhi nahi denge……

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  17. सर मेरी एक समस्या है। मेरे पत्नी के पिता जी का देहात हो चूका हे और पत्नी के दादा जी के दो मकान है मेरी सासु अपने पति के मृतु के बाद भी उसी घर में रहती हे अब उनका देवर उन्हें जबरन घर खली करने को कह रहा है क्या मेरी सासु का क़ानूनी हक़ बनता है और केस फाइल किसके नाम से होगा मेरी पत्नी या सासु ।प्ल्ज़ help

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  18. हम लोग 2 भाई 2 sister है पिता जी 8 एकर जमींन तथा१००००० कर्ज छोर गए है वे १९९४ में स्वर्गवास हो गये ये कर्ज हमें जमीन बेच कर चुकाना है (जमीन की कीमत १९९४ में २०००० पार्टी एकर थी) इसके बाद हिन्दू एक्ट १९५६ के अनुसार बटवारा करना चाहता हूँ बहिनें कर्ज चुकाना नहीं चाहती
    क्या अदालत कर्ज चूका कर बटवारा की इजाजत देगी

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  19. सर,
    मई सरकारी कर्मचारी हु हम दो भाई है मैंने एक घर ख़रीदा है मई शादी शुदा हु दो बच्चियां है भाई private नौकरी में है मात पिता भाई के साथ रहते है मई सर्व सम्मति से अपने घर का आधा हिस्साउसे देना चाहता हु कृपया कर कानूनी प्रक्रिया बताये ताकि भविस्ये मेंकिसी प्रकार का विवाद न हो.
    धन्यवाद.

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  20. लोकेश जी मैं शिवशंकर पाण्डेय मैं आपसे यह मदद चाहता हूँ की मेरे नाना जी मेरे भाई के नाम कुछ जमीं वसीयत कर गए जिसका की अदालत में केस चल रहा है आज कुछ नहीं तोह २० साल होने को है आज तक उस जमीं का कोई हल नहीं निकल और नहीं कुछ हुआ बल्कि जो हमारे गवाह है उनकी भी उम्र हो चुकी है और मुझे डर है की उन्हें कुछ न हो जाये या निधन हो जाये तो मेरा केस फँस जायगा मैं ऐसा क्या करू की मेरे केस का फैसला मेरे हक़ में हो जाये कृपया करके कोई उपाय बताये जल्द से जल्द आपका बहुत आभारी रहूँगा

    मेरा नाम शिव शंकर पाण्डेय
    मोबाइल नंबर ९०३९९७३८०८
    शिवम.९५@रेदिफ्फ्मैल.com

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  21. सर जी
    मेरी समस्या यह है। कि
    मेरे पिताजी १९६० मे अपने चाचा के गोद गये।और उसके बाद उनके गोदपिता (पिताजी के चाचा)की मृत्यु हो गई।तब से मेरे पिता अपने मुलपिता यानी मेरे दादा के साथ ही रहते थे।तब मेरे पिता के मुलपिता ने सब सम्पति को अपने नाम करवा लिया। मेरे पिताजी की जो स्वअर्जित काश्त भूमि को भी उन्होने अपने नाम करवा लिया। मेरे दादा यानी पिता के मुल पिता की तीन बेटे थे ।बटवारे के समय उनहोने तीन हिस्से कर एक भाग मेरे पिता को दे दिया।और १९७६ मे मेरे दादा की मृतयु हो गई।
    तब से कोई विवाद नही था। पर हाल ही मे मेरे पिताजी की की मृत्यु जुन २०१५ मे होने के बाद मेरे चाचा ने गोदनामे को आधार बनाकर सम्पति से बेदखल कर प्राप्त सम्पति से नाम हटाने का कोर्ट मे वाद दायर किया है। अब हम कया करे ।कृपया समाधान बताकर हमारी सहायता करे।

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  22. श्रीमान जी,
    आपसे निवेदन है की हिन्दू उतराधिकारी संशोधन अधिनियम 2005 से पहले अगर पिता की मृत्यु हो गयी है तो उनकी सम्पति में पुत्री की हिस्सेदारी होगी या नहीं इस से सम्बधित किसी भी न्यायलय के द्वारा दिये गए फैसले की रिपोर्ट के जरीये उदाहरण देकर विस्तृत रूप से समझाने की मृपा करे |

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  23. मेरे पिता जी आयुक्त आयकर कार्यालय-1,सिव्हील लाइन नागपुर में जमादार पद पर पदस्थ थे. दिनांक 26-12-1994 उनका नाम किसी मामलों मे आने से उनको निलंबित किया गया. उस दिन से आज तक केस चालू है. और 30-6-2009 में उनकी निवृति हुई. फिर भी आज भी केस चालू हैं. फिर मेरे पिता जी की मानसिक ओर आर्थिक संकट के साथ हमारा परिवार गुजर रहा था. फिर 15-5-2014 में मेरे पिताजी का देहांत हो गया. फिर भी केस चालू हैं. ओर मेरी मां को पेन्शन नही मिल रहा है. आज मै आपसे यह जानना चाहता हूँ की मेरे परिवार की 22 साल में जो आर्थिक हानि, मानसिक दुर्बलता, जो हाल अपेष्ठा यहि उसके आधार पर हम अनुकंपा के पात्र है या नहीं. आज भी मेरे पिता पर कोई गुनाह सिद्ध नहीं हुआ है.

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  24. Dear sir mere dadaji ko unke uncle jo be aulad the us ke mar jane k bad Hindu act ke niyam se varasai se mili thi ye jamin ancestral property hi kahi ja shakti he? unke uncle ne koi will ya gift nahi ki thi dadaji abhi jinda हे dadaji ke uncle ki self property thi

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  25. पिता के पास आधी से ज्य़ादा प्रॉपर्टी दादा जी की है। कृपया बताएं कि क्या मुझे दादा की संपत्ति में अधिकार मिल सकता है?

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  26. ससुर ke सरकारी नौकरी में होता हुए क्या विधवा बहु एवं २ वर्षीय पोता क्या गुजरा भत्ता पाने का अधिकारी hai

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  27. sir hum 3 bhai hain mere papa ne 1 makaan loan par liya jisme mujhe co borrower banaya tha kyonki papa ki payment utani nahin thi. bad mein upar do kamre maine banaye hain usi loan mein ek aur loan lekar jiski puri kisht me jama karata hoon. main sabse bada beta hon tatha 2 chhote bhai hain. hum teenon ki shadi ho gayi hai papa bhi retired ho gaye hain. mere ek beti hai tatha sabse chhote bhai ke bhi ek beti hai. bich vale bhai ke pahle ek beti hai lekin abhi uske ek beta bhi ho gaya hai. mein aur mera sabse chhota bhai ek ek beti mein santosht hai.
    hame dar lagta hai kanhi hamare papa pura makaan pote ke naam nahin kar dein. jabki is makaan mein hum teeno bhaiyon ki mehnat aur pesa hai.
    Kya papa esa kar sakte hain unko yeh right hai? Kya is makaan par hamaara koi huk nahin hai. please iska jawab mere Email par bhejane ki kripa karin.

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  28. मैं बिहार से हूँ मेरी दादी जी समपत्ति उसके नाती और उसकी बेटी ने जबरदस्ती बेच दी हैं और मायके ले गई और खाना पीना नही देतीं हैं और उसे तग करती है। और उसका सलाह किया है।

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