समाचार पत्रों में छपी खबर विधेयक नहीं होती

राजस्थान हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें हाल ही में दिए गए आरक्षण को चुनौती दी गई थी। न्यायाधीश दलीप सिंह ने जनहित याचिका की सुनवाई करने के बाद याचिकाकर्ता को निर्देश दिए कि केवल समाचार पत्रों में छपी खबर के आधार पर ही यह नहीं माना जा सकता कि इस बारे में कानून बन गया है। इसके अलावा केबिनेट के पास होने या मुख्यमंत्री की ओर से केन्द्र को पत्र लिखना भी अपर्याप्त है। आरक्षण को लेकर अभी विधायिका ने कोई विधेयक पारित नहीं किया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि गुर्जरों और सवर्णों को आरक्षण दिए जाने की घोषणा कानून का रूप ले चुकी है।

न्यायालय ने यह भी कहा कि न्यायालय को कानून बनने के बाद ही उसकी समीक्षा करने का अधिकार है, पहले नहीं। याचिकाकर्ता कमलेश शर्मा की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि हाल ही में राजस्थान सरकार ने गूर्जरों और सवर्णों को जो आरक्षण दिया है वह कुल मिलाकर पचास प्रतिशत से अधिक हो जाता है। इसको लेकर उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि कुल आरक्षण पचास प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। जबकि अभी कुल 48 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था है। ऐसे में सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना की है।

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