ज्यादा लोकप्रिय हैं, तालिबान के शरीयत कोर्ट

ये कोर्ट स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे कोर्ट से कहीं ज्यादा लोकप्रिय साबित हो रहे हैं। पाकिस्तान स्थित तालिबान ने बजौर के कबाइली इलाके में शरीयत यानी इस्लामिक कानूनों के मुताबिक चलने वाली तमाम कोर्ट स्थापित कर लिए हैं। बजौर एजेंसी के हेड क्वॉर्टर खार से 20 किलोमीटर दूर सेवाई में तहरीक ए तालिबान पिछले दो सप्ताह से समानान्तर कोर्ट चला रहा है। लगभग दो दर्जन उलेमा इन कोर्टों में बतौर काज़ी काम कर रहे हैं।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया की जारी ख़बर के अनुसार, तालिबान के स्थानीय प्रवक्ता मौलवी उमर के मुताबिक हमने लोगों की इच्छाओं के मुताबिक ही कोर्ट स्थापित किए हैं। लोग इससे पहले की न्याय व्यवस्था से नाखुश थे। काज़ी इस्लामिक कानूनों के अच्छे जानकार हैं। लोग रुपये-पैसे और ज़मीन परिवार से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के लिए शरीयत कोर्ट जा रहे हैं। महिलाएं अपने पति के खराब व्यवहार की शिकायत करने के लिए भी आ रही हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ब्रिटिश राज से चले आ रहे Frontier Crime Regulation के तहत बना प्रशासन और उसकी न्यायिक व्यवस्था हमारा उत्पीड़न कर रही थी। शरीअत कोर्ट से जल्द और सस्ता न्याय मिलता है।

एक आदमी ने बताया कि मेरा विवाद राजनैतिक प्रशासन के कोर्ट में सालों से खिंच रहा था। शरीयत कोर्ट ने चंद दिनों में इसका निपटारा कर दिया। मौलवी उमर के मुताबिक लोग खुद ही तालिबान के शरीअत कोर्ट के पास अपने मामलों के निपटारे के लिए आ रहे हैं। हमारे लड़ाकों ने किसी को भी जबरन आने के लिए नहीं कहा।

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