अपनी इच्छा से दाढ़ी नहीं बढ़ा सकते: हाई कोर्ट

चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन में कार्यरत दो मुसलमानों की दाढ़ी बढ़ाए जाने की मांग संबंधी याचिका १४ जुलाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह कह कर खारिज कर दी कि अनुशासित फोर्स में चेहरे से पहचान होना जरूरी है। न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि अनुशासित सेना में मन मुताबिक काम नहीं किया जा सकता। धर्म कहीं बाध्य नहीं करता कि मुसलमानों के लिए दाढ़ी बढ़ाना अनिवार्य है।

अपने 38 पृष्ठों के फैसले में जस्टिस कोहली ने कहा कि यह सही है कि इसलाम दाढ़ी बढ़ाने का पक्षधर है लेकिन यह व्यक्ति विशेष की इच्छा पर निर्भर है। देश में बढ़ रही आतंकवादी घटनाओं को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि चेहरे से व्यक्ति की पहचान हो। लोक आदेश, नैतिकता और स्वास्थ्य के आधार पर दाढ़ी बढ़ाए जाने से किसी भी व्यक्ति को रोका जा सकता है। एयर फोर्स की नौकरी उच्च मानदंडों के साथ अनुशासन की मांग करती है। वायु सेना में कार्यरत होने के कारण याचियों पर भी यह नियम लागू होता है। प्राथमिक अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति दाढ़ी नहीं रख सकता। याचियों ने भी एयर फोर्स की नौकरी करते समय यह अनिवार्य अनुमति नहीं ली। उलटे नौकरी करते हुए दाढ़ी बढ़ाने की इच्छा जताई जो कि उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना है।

चंडीगढ़ एयर फोर्स स्टेशन में लीडिंग एयर क्राफ्ट्समैन अंसारी आफताब अहमद और कारपोरल मोहम्मद जुबैर की तरफ से याचिका में कहा गया कि उन्हें दाढ़ी बढ़ाए जाने की अनुमति दी जाए। याचिका में उच्च अधिकारियों के उस फैसले को खारिज करने की मांग की गई जिसमें उन्हें दाढ़ी बढ़ाए जाने से रोका गया था।

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