एम्स को आपराधिक मामले में अदालती नोटिस

दिल्ली की एक अदालत ने 12 वर्ष पुराने आपराधिक मामले में All India Institute of Medical Sciences (एम्स) के तत्कालीन महापंजीयक और Gastroenterology के प्रमुख को नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सहायक प्राध्यापक पद की भर्ती के दौरान जानबूझ कर एक चिकित्सक की अनदेखी की अतिरिक्त सत्र न्यायधीश एस.के. सरवरिया ने सोमवार २६ मई को तत्कालीन महापंजीयक वी.के.गुप्ता और गेस्ट्रोइंटेरोलॉजी के प्रमुख राकेश के टंडन को यह नोटिस जारी किया है।

न्यायालय ने अनूप सरया नामक एक चिकित्सक की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए यह नोटिस जारी किया। सरया ने आरोप लगाया था कि एम्स के तत्कालीन निदेशक एस.के. काकर जो उस समय चयन समिति के अध्यक्ष थे ने टंडन के साथ मिलकर जान बूझ कर उनका नाम प्रतीक्षा सूची से गायब कर दिया जबकि उस सूची में उनका नाम सबसे ऊपर था। सरया के अनुसार संचालन संस्था के सामने केवल दो उम्मीदवारों की सूची रखी गई जिसमें उनका नाम शामिल ही नहीं था जबकि वह प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर थे।

मामला तब प्रकाश में आया जब फरवरी 1996 में संस्थान ने उन्हें सहायक प्राध्यापक का पद सौंपने का प्रस्ताव रखा जिसे एक अन्य चिकित्सक ने चुनौती दी। वह चिकित्सक 1993 में हुए साक्षात्कार में सरया के साथ उपस्थित हो चुका था। सरया ने 29 फरवरी 1996 को इस संबंध में डिफेंस कालोनी पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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One thought on “एम्स को आपराधिक मामले में अदालती नोटिस”

  1. कौन है मालिक इस देस का? 1996 की शिकायत पर अदालत 2008 में समन जारी कर रही है।

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